नई दिल्ली/झारखंड: झारखंड के झरिया कोलफील्ड की 100 साल पुरानी भूमिगत आग और धंसाव की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने 5940.47 करोड़ रुपये के संशोधित मास्टर प्लान को मंजूरी दे दी है। यह फैसला बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में लिया गया।
झरिया मास्टर प्लान को मिली नई जान
संशोधित झरिया मास्टर प्लान (Jharia Revised Master Plan) का उद्देश्य झरिया में लंबे समय से जल रही कोयला खदानों की आग, ज़मीन धंसने की घटनाएं और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास जैसे गंभीर मुद्दों का स्थायी समाधान करना है।
कई दशकों से झेल रहे हैं जहरीली गैस और जमीन धंसाव की मार
झरिया में लगभग 100 वर्षों से अधिक समय से आग जल रही है, जिससे इलाके में रहने वाले हजारों परिवार जहरीली गैस, लगातार ज़मीन धंसने और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते आ रहे हैं। इस क्षेत्र को “भारत की कोयला राजधानी” भी कहा जाता है, लेकिन यहां के लोगों के लिए यह खिताब एक अभिशाप बन चुका है।
पुनर्वास और सुरक्षा कार्य होंगे प्राथमिकता में इस योजना के तहत:
- प्रभावित परिवारों का सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास
- कोयला खदानों की आग बुझाने के लिए तकनीकी उपाय
- भूमि धंसाव रोकने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे कार्य किए जाएंगे।
राज्य और केंद्र दोनों मिलकर करेंगे क्रियान्वयन
इस प्लान के तहत केंद्र सरकार, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और झारखंड राज्य सरकार मिलकर समन्वित प्रयासों से योजना को लागू करेंगे। इस प्लान का उद्देश्य केवल अग्निशमन ही नहीं, बल्कि स्थायी पुनर्वास और क्षेत्र का विकास भी है।
झरिया के लिए यह है उम्मीद की नई किरण
यह फैसला झरिया और आसपास के हजारों परिवारों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। वर्षों से उपेक्षित इस क्षेत्र को अब राष्ट्रीय प्राथमिकता में लाया गया है, जो आने वाले समय में पर्यावरणीय और मानवीय संकट से उबरने में मदद करेगा।
