धनबाद: झारखंड के भेलाटांड क्षेत्र से एक बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी जमीन के खाता को बदलकर करीब 4.1 एकड़ भूमि पर फर्जीवाड़ा किया गया है। शुरुआती जांच में इस मामले में कागजों में हेरफेर और जमीन हस्तांतरण से जुड़े गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।

जमीन को निजी बताकर बेचने की कोशिश
सूत्रों के अनुसार, यह जमीन राज्य सरकार के रिकॉर्ड में ‘सरकारी भूमि’ के रूप में दर्ज है, लेकिन कथित रूप से इसे निजी खाता में दर्ज कर कुछ लोगों ने बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। मामले की भनक लगते ही राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन ने जांच शुरू की।
पुराने रजिस्ट्रेशन और खाता दस्तावेजों की जांच जारी
जांच में यह बात सामने आई है कि पुराने खाता और रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों में जानबूझकर हेरफेर किया गया। अब प्रशासन रेवेन्यू रिकॉर्ड, दाखिल-खारिज और म्यूटेशन की फाइलों की गहन जांच कर रहा है।
जवाबदेही तय करने की तैयारी, FIR की संभावना
अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिन अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
स्थानीय प्रशासन ने रोका भूमि लेन-देन
फिलहाल प्रशासन ने इस 4.1 एकड़ भूमि पर किसी भी तरह के लेन-देन, निर्माण या कब्जा गतिविधि पर रोक लगा दी है। मौके पर बोर्ड लगाकर यह भूमि सरकारी संपत्ति घोषित कर दी गई है।
क्या बोले अधिकारी ?
राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया: “हमारे पास स्पष्ट रिकॉर्ड है कि यह जमीन सरकारी है। दस्तावेजों में बदलाव कर इसे निजी घोषित करना एक गंभीर अपराध है। संबंधित अधिकारियों और दलालों पर कार्रवाई होगी।”
भूमि घोटालों पर प्रशासन सख्त
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि भूमि रिकॉर्ड की पारदर्शिता और डिजिटल वेरिफिकेशन की ज़रूरत अब और भी ज्यादा हो गई है।
