जम्मू, जम्मू-कश्मीर | 30 जून 2025: श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए ऑफलाइन पंजीकरण प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु जम्मू के विशेष टोकन केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। यात्रा 3 जुलाई से बालटाल और पहलगाम मार्गों से शुरू होगी। जो श्रद्धालु अब तक ऑनलाइन पंजीकरण नहीं करवा सके थे, उनके लिए यह ऑफलाइन प्रक्रिया अहम मानी जा रही है।
📍 टोकन के आधार पर कल से शुरू होगा पंजीकरण
दक्षिण जम्मू के SDM मनु हंसा ने बताया कि: “हम अमरनाथ यात्रियों का स्वागत करते हैं। आज से जम्मू के सरस्वती धाम में टोकन वितरण केंद्र की शुरुआत की गई है। इन्हीं टोकन के आधार पर कल से तीन अलग-अलग केंद्रों पर पंजीकरण किया जाएगा।” उन्होंने यात्रियों को यह भी आश्वस्त किया कि सभी व्यवस्थाएं सुरक्षित, व्यवस्थित और श्रद्धालु हित में की गई हैं।
🛖 बारिश के मद्देनज़र विशेष इंतज़ाम
प्रशासन ने मौसम को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतज़ाम किए हैं: वॉटर प्रूफ टेंट लगाए गए हैं ताकि बारिश से श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। पेयजल और शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। जल्द ही लंगर सेवा (भंडारा) भी शुरू की जाएगी ताकि यात्रियों को भोजन की असुविधा न हो। SDM मनु हंसा ने यात्रियों से धैर्य और सहयोग बनाए रखने की अपील की है और कहा कि सभी को सुरक्षित और सुखद यात्रा अनुभव देने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
🕉️ 3 जुलाई से शुरू होगी आधिकारिक यात्रा
श्री अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ 3 जुलाई 2025 से होगा और यह बालटाल तथा पहलगाम दोनों मार्गों से संचालित की जाएगी। यात्रा के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र, पंजीकरण स्लिप और ID प्रूफ अनिवार्य होंगे। सुरक्षा बलों की तैनाती और मेडिकल कैंप की व्यवस्था पहले से ही की जा रही है।
🙏 श्रद्धालुओं में उत्साह, प्रशासन की सराहना
टोकन केंद्रों पर पहुंचे श्रद्धालुओं में यात्रा को लेकर भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। कई श्रद्धालुओं ने प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं की सराहना की और कहा कि इस बार यात्रा अनुभव पहले से कहीं अधिक सुव्यवस्थित नजर आ रहा है।
अमरनाथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आस्था, संयम और समर्पण की प्रतीक यात्रा है। जम्मू प्रशासन की ओर से पंजीकरण से लेकर यात्रा मार्गों तक की तैयारियों ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा मिले। अब सभी की निगाहें 3 जुलाई के शुभारंभ और पहले जत्थे की यात्रा पर टिकी हैं।
