नई दिल्ली/कोलकाता, 30 जून 2025: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक लॉ कॉलेज में कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। इस घटना को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चार सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग समिति गठित की है, जो शनिवार को कोलकाता के लिए रवाना हो गई। समिति के सदस्य पूर्व केंद्रीय मंत्री सतपाल सिंह, केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी, पूर्व त्रिपुरा सीएम बिप्लब कुमार देब और वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा हैं।
🗣️ सतपाल सिंह का बयान: “महिलाएं असुरक्षित, TMC पर गंभीर आरोप”
कोलकाता रवाना होने से पहले समिति के सदस्य सतपाल सिंह ने कहा: “पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पिछले साल आरजी कर मेडिकल कॉलेज में भी इसी प्रकार का दुष्कर्म हुआ था, और अब एक लॉ कॉलेज में ऐसा ही मामला सामने आया है। मुख्य आरोपी TMC का सदस्य बताया जा रहा है।”
उन्होंने TMC नेताओं द्वारा की गई कथित बयानबाज़ी को “दुर्भाग्यपूर्ण और असंवेदनशील” करार दिया और कहा कि समिति पीड़िता के परिजनों और अन्य संबंधित पक्षों से मुलाकात कर सच्चाई की पड़ताल करेगी।
👩⚖️ मीनाक्षी लेखी का सवाल: “महिला मुख्यमंत्री के बावजूद हालात इतने भयावह क्यों?” केंद्रीय मंत्री और समिति की सदस्य मीनाक्षी लेखी ने कहा:
“पश्चिम बंगाल में एक महिला मुख्यमंत्री हैं, लेकिन इसके बावजूद राज्य में लगातार महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध हो रहे हैं। हमारा पैनल यह भी जांच करेगा कि आरोपी जैसे व्यक्ति को, जिसकी पहले से आपराधिक पृष्ठभूमि है, कॉलेज में प्रवेश और पहुंच कैसे दी गई?” उन्होंने राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि टीम यह भी जांच करेगी कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है।
🧭 समिति की प्राथमिकताएं:
- पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात
- कॉलेज प्रशासन और छात्रों से बातचीत
- स्थानीय पुलिस से मामले की जानकारी लेना
- घटनास्थल और आरोपियों की पृष्ठभूमि की जांच
- रिपोर्ट को पार्टी नेतृत्व और मीडिया के सामने प्रस्तुत करना
🔥 राजनैतिक टकराव की जमीन तैयार?
TMC और भाजपा के बीच पहले से ही तनावपूर्ण रिश्तों के बीच यह मामला एक नए सियासी टकराव का केंद्र बन सकता है। भाजपा जहां इसे कानून-व्यवस्था का सवाल बता रही है, वहीं TMC नेताओं द्वारा मामले पर प्रतिक्रिया अब जांच के दायरे में आ सकती है।
भाजपा ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समिति को पूरी अनुमति और सहयोग प्रदान करेंगी। कोलकाता में सामने आया यह मामला न केवल महिला सुरक्षा के सवालों को फिर से उठाता है, बल्कि यह दिखाता है कि कैसे ऐसे मुद्दे देश की राजनीति और प्रशासनिक जवाबदेही की कड़ी परीक्षा बन जाते हैं। अब सबकी नजर इस समिति की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।
