बिहार विधानसभा चुनाव 2025: INDIA गठबंधन ने सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय किया, झामुमो नाराज़

राजीव कुमार ओझा

पटना/रांची: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर INDIA गठबंधन ने तैयारियां तेज कर दी हैं और सीट बंटवारे का प्रारूप लगभग तय कर लिया गया है। इस फार्मूले में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को कोई भी सीट नहीं दी गई है, जिससे पार्टी में नाराजगी है। झामुमो ने ऐलान किया है कि वह हर हाल में बिहार चुनाव लड़ेगी।

INDIA गठबंधन में सीटों का बंटवारा इस प्रकार होगा :

राजद – 138 सीटें
कांग्रेस – 54 सीटें
वाम दल – 30 सीटें
वीआईपी (VIP) – 18 सीटें

यदि रालोजपा (राष्ट्रवादी लोक जनशक्ति पार्टी) गठबंधन में शामिल होती है, तो बची हुई 3 सीटें उसे दी जाएंगी।

झामुमो की नाराजगी क्यों ?
पटना में हाल ही में हुई दो बैठकों में झामुमो को न बुलाए जाने और सीट न दिए जाने से पार्टी नाराज़ है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव मनोज पांडे ने रांची में कहा कि झामुमो बिहार में भी संगठन मजबूत कर रहा है और हम चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। झामुमो ने 2020 में भी बिहार में उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी का मानना है कि वह सीमांचल और संथाल से सटे इलाकों में प्रभावशाली है, इसलिए उसे नजरअंदाज करना गठबंधन के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

🔹 झामुमो की नाराजगी: बिना आमंत्रण, बिना हिस्सेदारी
झामुमो के केंद्रीय महासचिव मनोज पांडे ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा: “हमारा बिहार में भी जनाधार है। हमने पहले भी चुनाव लड़ा है और अब भी लड़ेंगे। पटना में दो बैठकों में न बुलाया गया और सीटें भी नहीं दी गईं, जो अपमानजनक है। हम मजबूती से मैदान में उतरेंगे।”

🔹 क्या फॉर्मूला में लचीलापन है ?
गठबंधन के सूत्रों के अनुसार, तय फॉर्मूले में 5% तक सीटों का एडजस्टमेंट संभव है। यह एडजस्टमेंट उम्मीदवार की क्षमता, सामाजिक समीकरण और स्थानीय राजनीतिक दबाव को देखकर किया जाएगा। विवादित सीटों पर गठबंधन की को-ऑर्डिनेशन कमेटी निर्णय लेगी। जिन दलों के बीच सहमति नहीं बन पाएगी, वहां उम्मीदवार का चयन राजनीतिक हैसियत और जीत की संभावना के आधार पर किया जाएगा।

🔹 झारखंड में गठबंधन धर्म निभाया, तो बिहार में क्यों नहीं ?
झामुमो का तर्क है कि उन्होंने झारखंड में राजद को सम्मान दिया और सत्ता में भागीदारी भी दी। पिछले कार्यकाल में राजद के एक विधायक को मंत्री भी बनाया गया। अब जब बात बिहार की है, तो झामुमो को नजरअंदाज किया जाना “दोगला रवैया” है।

गठबंधन का फार्मूला किस आधार पर बना ?
यह फार्मूला 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टियों के प्रदर्शन के आधार पर तय किया गया है:

राजद ने 23 लोकसभा सीटों में से 9 जीती थीं,
कांग्रेस ने 3,
वाम दलों ने 5,
और VIP को 3 सीटें मिली थीं।

इन्हीं आंकड़ों के आधार पर विधानसभा की 243 सीटों का बंटवारा किया गया है।

क्या बदलाव की गुंजाइश है ?
गठबंधन में प्रत्याशी की क्षमता और सामाजिक समीकरण के आधार पर 5% तक सीटों में बदलाव संभव है। विवादित सीटों पर कोऑर्डिनेशन कमिटी निर्णय लेगी।

जहां INDIA गठबंधन ने रणनीति स्पष्ट कर दी है, वहीं झामुमो की नाराजगी आगे चलकर चुनौती बन सकती है। गठबंधन की एकता और सीटों पर सहमति अब राजनीतिक भविष्य के लिए अहम भूमिका निभाएगी। INDIA गठबंधन में अंतर्विरोध अब खुलकर सामने आ रहे हैं। सीट बंटवारे को लेकर अगर असंतोष गहराया, तो यह गठबंधन की संभावनाओं को कमजोर कर सकता है। झामुमो का सीमांचल और ट्राइबल बेल्ट में अच्छा-खासा आधार है, जिसे नजरअंदाज करना राजनीतिक चूक हो सकती है। दूसरी ओर, राजद-कांग्रेस-वाम दलों का यह भी मानना है कि उन्हें ही असली ताकत दी जाए क्योंकि उन्होंने लोकसभा में बेहतर प्रदर्शन किया है।

बिहार चुनाव 2025 में INDIA गठबंधन की तैयारियां तो तेज हैं, लेकिन अंदरूनी मतभेद भी तेजी से उभर रहे हैं। झामुमो जैसे सहयोगियों को साथ लिए बिना कोई भी गठबंधन मजबूत नहीं हो सकता। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन अपने असंतुष्ट सहयोगियों को कैसे मनाता है — या फिर झामुमो अपने दम पर मैदान में उतरता है।

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