🗓️ 25 जुलाई 2025 | 🖋️ रिपोर्ट: विशेष संवाददाता | 📍सोनीपत, हरियाणा
हरियाणा के प्रसिद्ध लोक गायक मीता बरोदा पर गुरुवार रात उनके ही गांव बरोदा में जानलेवा हमला हुआ। गांव के ही मंजीत नामक युवक ने उन पर तीन बार फायरिंग की, लेकिन गायक मीता बरोदा बाल-बाल बच गए।
🔫 तीन फायर, एक मिस—गायक की सूझबूझ से बची जान
घटना के वक्त मीता अपने चचेरे भाइयों के साथ अपने प्लॉट पर मौजूद थे। तभी हमलावर मंजीत अकेला गाड़ी से उतरकर वहां पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा। बात बढ़ी तो मंजीत ने पिस्तौल निकालकर पहले हवाई फायर किया, फिर दूसरा फायर मीता पर किया, लेकिन वे झुक गए और गोली उन्हें नहीं लगी। तीसरा फायर मिस हो गया।
मीता और उनके भाइयों ने साहस दिखाते हुए मंजीत से हथियार छीना और उसकी धुनाई कर दी, जिसके बाद आरोपी मौका पाकर फरार हो गया।
👮♂️ पुलिस में शिकायत, केस दर्ज
घटना की सूचना मिलते ही बरोदा थाना पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। मीता बरोदा की शिकायत पर मंजीत के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। गायक का कहना है कि आरोपी के पास दो पिस्तौल थे, जो पुलिस को सौंप दिए गए हैं।
⚖️ पुरानी राजनीतिक रंजिश बनी हमले की वजह?
गायक मीता बरोदा ने बताया कि घटना की जड़ें पिछले विधानसभा चुनाव से जुड़ी हुई हैं।
उनका कहना है कि चुनाव के दौरान वे डॉ. कपूर नरवाल के कार्यक्रम में प्रस्तुति देने पहुंचे थे और मंच से उन्हें समर्थन देने की अपील की थी।
गांव के मंजीत को यह बात नापसंद आई, क्योंकि वह कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थक था। इसको लेकर फोन पर धमकी भी दी गई थी।
💰 जमीन सौदे में भी हस्तक्षेप का आरोप
मीता ने यह भी आरोप लगाया कि लगभग 7 महीने पहले गोहाना में उन्होंने एक प्लॉट खरीदने का सौदा किया था, जिसमें मंजीत और उसके साथियों ने हस्तक्षेप कर डील को रद्द करवा दिया। इस सौदे में गायक के करीब 3 लाख रुपये फंस गए।
🏗️ प्लॉट पर निर्माण की योजना
मीता बरोदा ने बताया कि वे दिल्ली और गुरुग्राम में रहते हैं, लेकिन गांव में अपने खेत की मिट्टी भरवाकर वहां निर्माण की तैयारी कर रहे हैं। वे इसी उद्देश्य से गुरुवार रात गांव आए थे, जब उन पर यह हमला हुआ।
🎤 गानों से देते हैं सामाजिक संदेश
मीता बरोदा न केवल एक लोकप्रिय गायक हैं, बल्कि वे अपने गीतों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर भी लोगों को जागरूक करते रहे हैं।
उनका गीत “धारी भाभी होवै से नाराज, मैने पीनी छोड़ दी” काफी प्रसिद्ध हुआ था, जिसमें नशामुक्ति का संदेश दिया गया था। वे शराब, दहेज और अन्य सामाजिक बुराइयों पर भी गीत बना चुके हैं।
यह घटना न केवल एक लोकप्रिय कलाकार पर हमला है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि राजनीतिक और निजी रंजिशें किस हद तक खतरनाक रूप ले सकती हैं। गायक मीता बरोदा की सूझबूझ और साहस से उनकी जान बच गई, लेकिन यह घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए चिंता का विषय है।
