बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासी घमासान, विपक्ष ने बताया ‘गुप्त एनआरसी’

पटना, 30 जून 2025: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गई है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को एनआरसी (NRC) की शुरुआत और वोटर अधिकारों से वंचित करने की साजिश करार दिया है।

🗳️ क्या है विशेष गहन पुनरीक्षण?

निर्वाचन आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इस गहन प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सम्मिलित हों और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में न रहे। यह कार्य 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।प्रक्रिया के तहत मतदान केंद्र पदाधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे और एन्युमरेशन फॉर्म भरवाएंगे। BLO कम से कम तीन बार मतदाता के घर जाएगा और ऑनलाइन फॉर्म भरने का विकल्प भी उपलब्ध है।

📋 किन दस्तावेजों की ज़रूरत होगी?

निर्देशों के अनुसार:

  • 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे व्यक्ति को जन्म तिथि/स्थान के प्रमाण देने होंगे।
  • 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाता को स्वयं या माता-पिता में से किसी एक का दस्तावेज देना होगा।
  • 2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे को स्वयं के साथ माता-पिता दोनों के दस्तावेज देना अनिवार्य है।

इन दस्तावेजों में शैक्षणिक प्रमाणपत्र, जन्म प्रमाणपत्र, सरकारी दस्तावेज, OBC/SC/ST सर्टिफिकेट, फैमिली रजिस्टर, एनआरसी एंट्री, भूमि आवंटन सर्टिफिकेट आदि स्वीकार होंगे।

⚠️ विपक्ष की आपत्तियाँ: “मतदाता सूची को आधार बनाकर वोट काटे जाएंगे”

भाकपा (माले)-लिबरेशन, तेजस्वी यादव और असदुद्दीन ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है।

✍️ भाकपा (माले)-लिबरेशन का आरोप:

“यह प्रक्रिया असम के एनआरसी जैसी है। 8 करोड़ लोगों को महज तीन महीने में कवर करना अव्यवहारिक है, खासकर मानसून और खेतीबाड़ी के मौसम में। लाखों लोग बाहर मजदूरी करते हैं — वे शामिल नहीं हो पाएंगे।”

📣 तेजस्वी यादव (नेता प्रतिपक्ष) ने कहा:

“यह प्रधानमंत्री मोदी का निर्देश है — पुरानी मतदाता सूची रद्द कर, 1987 से पहले के दस्तावेज मांगकर नई सूची तैयार करना। यह एक षड्यंत्र है जिससे गरीबों और पिछड़ों का वोट काटा जाएगा।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इसके जरिए लोगों को राशन, पेंशन, छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं से भी वंचित किया जा सकता है।

🗨️ असदुद्दीन ओवैसी का बयान:

“यह ‘गुप्त एनआरसी’ है। सबसे गरीब लोग — खासकर सीमांचल के — अपने माता-पिता के जन्म प्रमाणपत्र कहां से लाएंगे? जिनके पास दो वक्त की रोटी मुश्किल से है, उनके लिए यह क्रूर मज़ाक है।”

🧮 चुनौतीपूर्ण है प्रक्रिया का समय और स्केल

बिहार में 7.89 करोड़ मतदाता हैं और निर्वाचन आयोग को यह कार्य 30 सितंबर तक पूरा करना है। आयोग का दावा है कि उसने 78,000 BLO पहले से नियुक्त किए हैं और 20,603 नए BLO व 1 लाख वॉलंटियर जोड़े जा रहे हैं। इसके अलावा 1,54,977 बूथ स्तर एजेंट भी सभी मान्यता प्राप्त पार्टियों ने नियुक्त किए हैं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे।

🗓️ दावा-आपत्ति अवधि: 1 अगस्त से 1 सितंबर

यदि कोई व्यक्ति तय समय में फॉर्म नहीं भर पाता, तो वह फॉर्म-6 और घोषणा पत्र के जरिए नाम जुड़वाने का दावा कर सकता है।

निर्वाचन आयोग की सफाई: पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि: यह कोई एनआरसी प्रक्रिया नहीं, बल्कि मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। सभी कार्य संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 16 के अंतर्गत हो रहे हैं। किसी भी योग्य मतदाता को बाहर नहीं किया जाएगा, बल्कि सभी पात्र नागरिकों को जोड़ने का उद्देश्य है।

बिहार में चुनाव से पहले शुरू हुई यह प्रक्रिया चुनावी तैयारियों का हिस्सा है या राजनीतिक रणनीति — इस पर बहस तेज़ हो चुकी है। जहां आयोग इसे पारदर्शिता के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे एक संकट और असहमति का केंद्र मान रहा है। अब देखना होगा कि क्या यह प्रक्रिया समय पर और निष्पक्ष तरीके से पूरी हो पाएगी या यह चुनाव से पहले एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *