आलोक कुमार सिंह की रिपोर्ट, पलामू, झारखंड: गारू झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व में स्थित मारोमार रेस्ट हाउस, प्रकृति प्रेमियों और शांति की तलाश में रहने वाले लोगों के लिए एक आदर्श स्थल साबित हो रहा है। अंग्रेजों के जमाने में वर्ष 1947 में स्थापित यह ऐतिहासिक रेस्ट हाउस आज भी अपनी पुरानी भव्यता और ऐतिहासिक महत्व के साथ मौजूद है। यह स्थल न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां का शांतिपूर्ण वातावरण भी मन को सुकून पहुंचाता है। मारोमार रेस्ट हाउस पलामू टाइगर रिजर्व के बीचों बीच, हरे-भरे जंगलों और वन्यजीवों के समीप स्थित है।
पर्यटकों के लिए बेहतरीन विकल्प- यहां आने वाले पर्यटक शहरी जीवन की भागदौड़ और तनाव से राहत पाने के लिए एक बेहतरीन विकल्प खोज सकते हैं। वन विभाग ने यहां सभी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की है, जिससे पर्यटक पूरी तरह से प्रकृति की गोद में आराम और आनंद ले सकें। इस क्षेत्र में बाघ, हाथी, हिरण, और पक्षियों की कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक प्रमुख आकर्षण हैं। इस वन कर्मियों के ने वन्यजीवों के नजदीक से दर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा, सर्दियों के मौसम में रेस्ट हाउस की बुकिंग में खासा इजाफा होता है, जिससे सरकार को भी अच्छा राजस्व प्राप्त होता है।
प्राकृतिक सौंदर्य के प्रमुख स्थल- मारोमार रेस्ट हाउस के निकट स्थित सुगाफॉल और मिर्चाइया फॉल जैसे जलप्रपात भी पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण हैं। बरसात के दिनों में सुगाफॉल की तेज धार और उसकी सुंदरता पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। वन विभाग ने सुगाफॉल में सौंदर्यीकरण के काम को आगे बढ़ाया है, जिसमें लकड़ी की सीढ़ियां और गाजीबो शामिल हैं। ये सुविधाएं पर्यटकों को एक अनोखा अनुभव प्रदान करती हैं और क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाती हैं।
बढ़ती बुकिंग और राजस्व- बारेसाढ़ के रेंजर तरुण कुमार सिंह ने बताया कि नवंबर और दिसंबर में मारोमारा रेस्ट हाउस की बुकिंग सबसे अधिक होती है। इन महीनों में पर्यटकों की बड़ी संख्या यहां आती है, जिससे सरकार को अच्छा राजस्व प्राप्त होता है। पलामू टाइगर रिजर्व का मारोमारा रेस्ट हाउस प्रकृति प्रेमियों और ऐतिहासिक स्थलों के शौक़ीन लोगों के लिए एक संपूर्ण अनुभव प्रस्तुत करता है, जो शांति, रोमांच, और ऐतिहासिक महत्व का अनूठा संगम है।

